नदियों की आवाज
एक ओर हम १८५७ के शहीदों के याद करते हुए आजादी का पहला जंग का जश्न मना रहे हैं. उधर हमारे जीवन के आधार - जल, जमीन, जंगल, अन्न - पर विदेशी कम्पनियां नियन्त्रण कायम कर रही हैं. क्या हमारी आजादी बच पायेगी? राजेन्द्र सिंह की प्रस्तुती,यह लेख पी.एन.एन. द्वारा प्रकाशित की गई.
Posted by collective at July 03, 2007 09:01 PM